( ओ ) अक्षर लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ तथा प्रयोगtopjankari.com

( ओ ) अक्षर लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ तथा प्रयोग

( ओ ) अक्षर लोकोक्तियाँ व उनके अर्थ तथा प्रयोग.

save water save tree !

ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर= (कष्ट सहने के लिए तैयार व्यक्ति को कष्ट का डर नहीं रहता।)
प्रयोग- बेचारी शांति देवी ने जब ओखली में सिर दे ही दिया है तब मूसलों से डरकर भी क्या कर लेगी!

ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती= (किसी को इतनी कम चीज मिलना कि उससे उसकी तृप्ति न हो।)
प्रयोग- किसी के देने से कब तक गुजर होगी, तुम्हें यह जानना चाहिए कि 'ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती'।

ओछे की प्रीति, बालू की भीति= (दुष्ट का प्रेम अस्थिर होता है)
प्रयोग- भई शंकर! दयाराम जैसे घटिया आदमी से अब भी तुम्हारी पटती है?' शंकर बोला, 'नहीं चाचाजी! मैंने उसका साथ छोड़ दिया। अब मैं समझ चुका हूँ कि ओछे की प्रीति, बालू की भीति के समान होती है'।